Free somvar vrat katha in hindi: सोमवार व्रत कथा फल pdf2023

नमस्ते दोस्तों आप सभी का hindinerve blog में स्वागत है| इस लेख पर हम somvar vrat katha in hindi के बारे में पढ़ेंगे और जानेंगे कि भगवान शिव की कृपा हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है क्योंकि भगवान शंकर इतने भोले हैं कि अगर हम अपनी निष्ठा से भगवान शिव की उपासना करें तो उनकी कृपा हमें अटूट रूप से मिलती है somvar  सोमवार का दिन भगवान शंकर के लिए समर्पित है और इस दिन लोग उपवास रखते हैं

भगवान शंकर त्रिलोकी नाथ हैं जो अनाथ हैं उनके भी नाथ हैं अगर हम सोमवार व्रत कथा को सच्चे भाव से पढ़ेंगे और सुनेंगे कि भगवान की लीला कितनी निराली है और हमें इस somvar vrat katha in hindi से मनवांछित फल अवश्य प्राप्त प्राप्त होते हैं|

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सोमवार व्रत कथा somvar vrat katha in hindi

भगवान शिव के प्रति साहूकार की निष्ठा

एक बार किसी एक नगर राज्य में एक साहूकार था। भगवान शिव का परम पुजारी था उसके घर में धन वैभव की कोई कमी नहीं थी लेकिन कोई संतान न होने के कारण मन बहुत पीड़ित रहता था। संतान प्राप्ति के लिए वह हर सोमवार को उपवास रखता था और पूरी श्रद्धा निष्ठा के साथ शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता था। उसकी भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती प्रसन्न होकर भगवान शिव से साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का निवेदन किया। पार्वती जी के कहने पर भगवान शिव ने कहा कि ‘हे पार्वती, इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल मिलता है

जिसके भाग्य में जो हो उसे भोगना ही पड़ता है यह पिछले जन्म का कर्म हो सकता है| लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की भक्ति देखकर उसकी मनोकामना पूर्ण करने की इच्छा व्यक्त की। माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान तो दिया लेकिन उन्होंने बताया कि यह बालक 12 वर्ष तक ही जीवित रहेगा। यहां कर्म प्रधान है देवी! 

somvar vrat katha in hindi
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भगवान शिव और साहूकार का कर्म 

 भगवान शिव और माता पार्वती की बातचीत को साहूकार सुन रहा था, इसलिए उसे ना तो इस बात की खुशी थी और ना ही दुख। वह पहले की भांति शिवजी की पूजा करता रहा। कुछ समय के बाद साहूकार की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। जब वह बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी गंगा  भेज दिया गया। साहूकार ने पुत्र के मामा को बुलाकर उसे बहुत सारा धन देते हुए कहा कि तुम इस बालक को काशी विद्या प्राप्ति के लिए ले जाओ।

तुम लोग रास्ते में यज्ञ कराते जाना और ब्राह्मणों को भोजन-दक्षिणा देते हुए जाना। दोनों मामा-भांजे इसी तरह यज्ञ कराते और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते काशी नगरी निकल पड़े। इस दौरान रात में एक नगर पड़ा जहां नगर राज्य के राजा की कन्या का विवाह था | लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह होने वाला था वह एक आंख से काना था।

राजकुमार के पिता ने अपने पुत्र के काना होने की बात को छुपाने के लिए सोचा क्यों न उसने साहूकार के पुत्र को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूं। विवाह के बाद इसको धन देकर विदा कर दूंगा और राजकुमारी को अपने नगर ले जाऊंगा। लड़के को दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से विवाह करा दिया गया। somvar vrat katha in hindi

भगवान शिव और माता पार्वती का भ्रमण

साहूकार का पुत्र ईमानदार था। उसे यह बात सही नहीं लगी इसलिए उसने अवसर पाकर राजकुमारी के दुपट्टे पर लिखा कि ‘तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन जिस राजकुमार के संग तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है। मैं तो काशी पढ़ने जा रहा हूं।’ जब राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखी बातें पढ़ी तो उसने अपने माता-पिता को यह बात बताई। राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया फिर बारात वापस चली गई। दूसरी ओर साहूकार का लड़का और उसका मामा काशी पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने यज्ञ किया।

जिस दिन लड़का 12 साल का हुआ उस दिन भी यज्ञ का आयोजन था लड़के ने अपने मामा से कहा कि मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मामा ने कहा कि तुम अंदर जाकर आराम कर लो। शिवजी के वरदानुसार कुछ ही देर में उस बालक के प्राण निकल गए। मृत भांजे को देख उसके मामा ने विलाप करना शुरू किया। संयोगवश उसी समय शिवजी और माता पार्वती उधर से जा रहे थे।

पार्वती माता ने भोलेनाथ से कहा- स्वामी, मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहा, आप इस व्यक्ति के कष्ट को अवश्य दूर करें।जब शिवजी मृत बालक के समीप गए तो वह बोले कि यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे मैंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया था, अब इसकी आयु पूरी हो चुकी है लेकिन मातृ भाव से विभोर माता पार्वती ने कहा कि हे महादेव, आप इस बालक को और आयु देने की कृपा करें अन्यथा इसके वियोग में इसके माता-पिता भी तड़प-तड़प कर मर जाएंगे।          somvar vrat katha in hindi

माता पार्वती का निवेदन

माता पार्वती के पुन: आग्रह पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित होने का वरदान दिया। शिवजी की कृपा से वह लड़का जीवित हो गया। शिक्षा पूरी करके लड़का मामा के साथ अपने नगर की ओर वापस चल दिया। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां उसका विवाह हुआ था। उस नगर में भी उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। उस लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी खातिरदारी की और अपनी पुत्री को विदा किया।

व्रत का फल
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इधर नगर में साहूकार और उसकी पत्नी भूखे-प्यासे रहकर बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने प्रण कर रखा था कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो वह भी प्राण त्याग देंगे परंतु अपने बेटे के जीवित होने का समाचार पाकर वह बेहद प्रसन्न हुए। उसी रात भगवान शिव ने साहूकार के स्वप्न में आकर कहा- हे भक्त, मैंने तुम्हारे सोमवार के व्रत somvar vrat katha in hindi करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तुम्हारे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान की है। इसी प्रकार जो कोई सोमवार व्रत करता है या कथा सुनता या पढ़ता है उसके सभी कष्टों का निवारण होता है हैं और मनवांछित फल मिलता है|

      Title  somvar vrat katha in hindi PDF
    भाषा   हिंदी / hindi
   pdf size       3 MB
 website name   https://www.hindinerve.com/

 

सोमवार उपवास का विधि विधान 

पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में व्यक्ति को प्रातः स्नान करके शिव जी को जल और बेल पत्र चढ़ाना चाहिए तथा भगवान शिव का ध्यानपूर्वक आराधना करना चाहिए | शिव चालीसा तथा शिव व्रत कथा को पढ़ना या सुनना चाहिए तथा भगवान शिव की आरती को गुणगान करना चाहिए| तथा पूरे दिन कुछ मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए | जैसे:-      somvar vrat katha in hindi

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥ 

निष्कर्ष

भगवान शंकर इतने दयालु हैं कि उन्हें भोले बाबा के नाम से जाना जाता है अगर हम सोमवार का व्रत करते हैं तो भगवान शंकर की दया दृष्टि हमेशा बनी रहती है सोमवार का व्रत का संकल्प सोलह सोमवार का भी हो सकता है जिसमें एक अटूट समर्पण भगवान शिव के प्रति निखरता है और भगवान हमारे सारे दुखों को दूर करते हैं तथा हमें जीवन में एक नई राह का अनुभव कराते हैं और मनवांछित फल देकर इस जीवन को सार्थक बनाते हैं|

आशा करते है कि हमारा लेख somvar vrat katha in hindi आपको पसंद आया होगा कोई भी इससे जुड़ा प्रश्न पूछना हो तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं

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अध्यात्म क्या है ? क्या है जीवन का सार !

सोमवार के व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

सोमवार के दिन भगवान शिव का आराधना करना चाहिए और किसी भी चीज के लिए किसी को प्रताड़ित ना करें

सोमवार की व्रत कथा कैसे की जाती है?

सबसे पहले हमें स्नान करके तथा भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए इसके बाद सोमवार व्रत कथा को पढ़ना या सुनना चाहिए इसके बाद हमें भगवान शिव की आरती करना चाहिए|

सोमवार को व्रत रखने से क्या फायदा है?

सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है क्योंकि इस व्रत को रखने से हमें सारे दुखों से निवारण मिलता है तथा मनोवांछित फल प्राप्त होता है

सोमवार के व्रत कितने करने चाहिए?

वैसे सोमवार का व्रत आप हर सोमवार कर सकते हैं लेकिन सोलह सोमवार का व्रत का संकल्प होना भगवान शिव के समर्पण का भावना है

व्रत खंडित कैसे होता है?

व्रत के समय कोई भी ऐसा कार्य ना करें जो नकारात्मकता को बढ़ावा दें शांत रहें और भगवान का स्मरण करते रहें

 

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